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Showing posts from July, 2021

मेरा घर है कहाँ? - कविता

          मेरा घर है कहाँ? मेरा घर मेरा परिवार  ढूंढता हूँ मैं आज कोई मुझे बतला दो मेरा घर है कहाँ?      जन्म किसी स्थान पर लिया      पढ़ने कहीं और गया      नौकरी कहीं और की       मेरा घर है कहाँ      सोचा एक घर बनाएं      मिलकर उसे आज सजाएं      आंधी चली पत्ता उड़ा       मेरा घर है कहाँ            सुकून मेरा है कहाँ        आराम अब मिलेगा कहाँ       चैन अब तक न पाए है      मेरा घर है कहाँ        अंत समय कहाँ गुजरेगा        मोक्ष मुझे कब मिलेगा        ये सोच दिल में आये         मेरा घर है कहाँ      

हमने अबतक क्या है पाया- कविता

           हमने अबतक क्या है पाया        एक दिन यूं ही बैठे-बैठे,   हमें एक खयाल है आया  जीवन भर दौड़ कर भी,       हमने अबतक क्या है पाया    बचपन से अब तक,         हमें बस यही सिखाया है   मेहनत कर आगे बढ़ना है            यही राग सुनाया है     पर फिर भी सब कुछ पाकर,    खाली-खाली लगता है।    जीवन का हर एक सपना         अधूरा-अधूरा लगता है ।        सुबह से शाम तक         दिन यूहीं गुजरता है।     हररात कुछ करने की      प्रतिज्ञा नित करता है।             जिंदगी की वह सब खुशियां       जिन्हें मैं ढूंढता गया।    जिन्हें पाने की चाहत में        लम्हा हर गुजारता गया।      आंखों के सामने का मंजर,      सूना नजर आता है।   दिल क...

विद्यालय है एक उपवन- कविता

              विद्यालय है एक उपवन विद्यालय है एक उपवन, कुसुम हो तुम इसके । खाद  हैं माता-पिता, शिक्षक माली हैं इसके ।।   शिक्षित होने आए हो, शिक्षित होना होगा तुम्हें ।  माता-पिता-देश की, आशा पूरी करनी होगी तुम्हें ।।    समाज को आशा है तुमसे, उसे तुम करना पूर्ण । उसी से सब आशा तुम्हारी, न रहेगी कोई अपूर्ण ।।  डॉक्टर, इंजिनीयर, वकील या बनो तुम देश के रक्षक । देश की सेवा करनी है तुम्हें, न बनना तुम इसके भक्षक ।। देश को रखना साफ, करना तुम इसका विकास यह मातृभूमि है तुम्हारी, हृदय में स्थान हो  खास || विद्यालय है एक उपवन, कुसुम हो तुम इसके । खाद  हैं माता-पिता, शिक्षक माली हैं इसके ।।   शिक्षित होने आए हो, शिक्षित होना होगा तुम्हें ।  माता-पिता-देश की, आशा पूरी करनी होगी तुम्हें ।।