विद्यालय है एक उपवन- कविता
विद्यालय है एक उपवन
विद्यालय है एक उपवन, कुसुम हो तुम इसके ।
खाद हैं माता-पिता, शिक्षक माली हैं इसके ।।
शिक्षित होने आए हो, शिक्षित होना होगा तुम्हें ।
माता-पिता-देश की, आशा पूरी करनी होगी तुम्हें ।।
समाज को आशा है तुमसे, उसे तुम करना पूर्ण ।
उसी से सब आशा तुम्हारी, न रहेगी कोई अपूर्ण ।।
डॉक्टर, इंजिनीयर, वकील या बनो तुम देश के रक्षक ।
देश की सेवा करनी है तुम्हें, न बनना तुम इसके भक्षक ।।
देश को रखना साफ, करना तुम इसका विकास
यह मातृभूमि है तुम्हारी, हृदय में स्थान हो खास ||
विद्यालय है एक उपवन, कुसुम हो तुम इसके ।
खाद हैं माता-पिता, शिक्षक माली हैं इसके ।।
शिक्षित होने आए हो, शिक्षित होना होगा तुम्हें ।
माता-पिता-देश की, आशा पूरी करनी होगी तुम्हें ।।
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